सैनिक तुझे सलाम

सैनिक तुझे सलाम


एक बार मौका मिला था आर्मी कैंट जाने का। सच कहूं उस दिन मेरे रोंगटे खड़े हो गए थे। जवानों की टुकड़ियों को पहली बार मैंने इतने नजदीक से देखा था। खुद ब खुद गर्व जैसा महसूस होने लगा था। उनका जूनून, उनका अनुसाशन, उनके समर्पण का एहसास मुझे हो रहा था। आँखे भर आयी लेकिन छाती पूरी तनी हुयी थी। 
मन कर रहा था कि जाकर किसी से भी बात करू और थैंकयू बोलू, लेकिन डर भी लग रहा था इसलिए हिम्मत नही जुटा पाया। सच्चे दिल से उन्हें सैल्यूट किया और वहाँ से निकलने के बाद भी उन्हीं के बारे में सोच रहा था।

मेरा एक दोस्त भी मेरे साथ था और उससे मेरी बहस भी हो गयी थी। उसका कहना था कि आर्मी में बहुत पैसा हैं। सब कुछ मिलता हैं और उसके बाद जो सैलरी मिलती हैं..वो पूरी बचत। मैंने कहा सच...!! क्या चोर विधायकों, गुंडे सांसदों से भी ज्यादा सुविधा व पैसे उन्हें मिलते हैं। क्या उनकी भी लिमिटेड ड्यूटी हैं 6 घंटे की। क्या उन्हें भी आलिशान मकान और ऐशो-आराम मिलते हैं। 
मेरे दोस्त, अगर प्रधानमंत्री से भी ज्यादा वेतन मिले न किसी सैनिक को तो मैं उसे भी कम ही मानूंगा। क्योंकि सैनिक वो हैं जो हर पल..अपनी जान की बाजी लग रहा हैं उनके लिए जिन्हें वो जानता भी नहीं, पहचानता भी नही..और कभी न कभी अपनी पत्नी, बच्चे, बहन, बूढी माँ को लाचार, बेबस व अकेला छोड़ कर चला जाता हैं।

असल में देश के इन वीरो का सम्मान करने के लिए कोई एक दिन (आर्मी दिवस) की जरुरत नहीं हैं। क्योंकि ये रोज़ाना हर पल-हर समय सम्मान के पात्र हैं।  ये सब खैर रटी-रटाई बात हो गयी की, वो रात भर बॉर्डर पर जागते हैं तो हम चैन की नींद सोते हैं। दरसअल सैनिक का क़र्ज़ किसी भी तरह से अदा नही किया जा सकता। उनके बलिदान और उनके त्याग की व्याख्या की ही नहीं जा सकती। डॉक्टर आपकी जान बचाता हैं, वकील भी आपकी जान बचाता है लेकिन आपकी जान बचाने के लिए जो खुद की जान दे दे..वो बस एक सैनिक ही हैं। 

आज  "भारतीय सेना दिवस" हैं। आज पूरा देश उन जवानों को याद कर रहा हैं। लेकिन मैंने सभी सैनिकों से कह दिया हैं कि आज याद करके हम बिलकुल आपका धन्यवाद नहीं करना चाहते, क्योंकि किसी एक दिन..धन्यवाद बोलकर निकल जाना बहुत छोटी सी बात हैं। हमें आपपर रोजाना गर्व हैं..और हम हरपल, हरसमय आपका आभार व्यक्त करते हैं।

जय हिंद


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