धोनी मेरी जान..
क्रिकेट खेलना और देखना मैंने 2003 में शुरू किया जब मैं 8 साल का था। मुझे हल्का हल्का 2003 का वर्ल्ड कप फाइनल याद हैं। उस दौरान सचिन ही सबके पसंदीदा हुआ करते थे। मेरे भी वो फेवरेट थे और एक खिलाडी राहुल द्रविड़ भी मुझे बहुत पसंद थे। समय आगे बढ़ता गया, क्रिकेट में रूचि बढ़ती गयी। क्रिकेट देखना और खेलना जूनून बन गया। वक़्त और बीतता गया और मौका मिला करोड़ो लोगो की तरह इतिहास के साक्षी बनने का। 28 साल बाद 2011 वर्ल्ड कप भारत के जीतने के बाद जिस भारतीय की आँखे न भर आयी हो शायद वो क्रिकेटप्रेमी नहीं। मुझे याद हैं मैं रो पड़ा था और ख़ुशी के कारण मुझसे रात का खाना खाया नहीं जा रहा था। खैर, आगे बढ़ते हैं...पता नहीं लेकिन अचानक कही से मुझमे तेज़ी से भावनात्मक परिवर्तन हुआ और सचिन, द्रविड़ के अलावा दिल ने किसी और को भी पसंद करना शुरू कर दिया था, और वो नाम था.. #महेंद्र_सिंह_धोनी।
ऐसा नहीं था की धोनी ने अकेले वर्ल्ड कप जितवा दिया या फिर फाइनल उसकी बदौलत ही जीते। लेकिन पता नहीं क्यों वो विनिंग शॉट मुझसे आकर बार बार कह रहा था कि भाई थोड़ा सा क्रेडिट इस बन्दे को भी दे दे। क्योंकि खिलाड़ी तो हमारे पास पहले भी बहुत अच्छे अच्छे थे लेकिन शायद इस लंबे से 28 साल का सफर यही आदमी खत्म कर सकता था। हालांकि इससे पहले सभी प्रशंशको की तरह मुझे भी उसकी ताबड़तोड़ बल्लेबाज़ी अच्छी लगती थी लेकिन दिल से आवाज़ नहीं आ रही थी..हाँ अच्छा है, ठीक हैं।
मुझें बहुतो ने कहा कि भाई धोनी का दौर तो शुरुआत में ही था अब उसके प्रशंशक बन के क्या करोगे? मेरा जवाब..मेरे भाई दिल समय, उम्र, जगह, माहौल नहीं देखता..बस जब उसकी ज़िद होती हैं इसपे फ़िदा होना है तो होना हैं।
समय बीतता गया और समय के साथ साथ मेरी पसंद, दीवानगी और पागलपन में तब्दील होने लगी। और अगर आज मेरी दीवानगी का अंदाजा लगाना हैं तो बस मीरा का कृष्ण के प्रति दीवानगी का उदाहरण आप ले सकते हो। और जब से नीरज पांडे की एम एस धोनी मूवी आयी तब से तो मैंने हद ही कर दी। एक उदाहरण आपको देता हूं, अगर कभी मिलने का मौका मिले तो मेरा फ़ोन लेकर चेक कीजियेगा वालपेपर पे तो धोनी ही मिलेंगे साथ साथ गैलरी में उनके 1000 के आसपास तस्वीरों से भी आपको रूबरू होने को अवसर मिलेगा। इनकी वजह से कभी कभी मेरी आपसी रिश्तों में भी तनाव आने लगा। भाईओं और दोस्तों से न चाहते हुए भी नाराज़ रहना पड़ा। ये 6-7 नंबर पे बल्लेबाज़ी करने आते हैं और आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हो की इनका 20 गेंद में 5 रन पे खेलना भी मुझे सुहाना लगता है। और हाँ ऐसा करना तो नही चाहिए लेकिन इनकी बल्लेबाज़ी देखने के लिए मैंने कितनी ही बार ऊपरी क्रम के बल्लेबाज़ों के विकेट गिरने की प्रार्थना की है सिवाय चैंपियंस ट्रॉफी 2017 के फाइनल को छोड़कर..कसम से सच बोल रहा हूँ। खैर यहाँ अपनी दीवानगी बताने लग जाऊ तो वक़्त शायद कम पड़ जाए। आगे और क्या बताऊँ बस इतना समझ लीजिए की, कप्तानी से लेकर विकेटकीपिंग तक, कंसिस्टेंसी से लेकर फिनिशिंग तक, चतुराई से लेकर दरियादिली तक मुझे बस ये ही नजर आने लगे।
हाँ तो धोनी जी आपने क्या किया और क्या नहीं किया ये किसी के कहने या न कहने से साबित नहीं होता। लाखों में आपको नापसंद करने वाले होंगे लेकिन कितने ही करोड़ो में आपको पसंद करने वाले भी हैं। ये कहते तो रहते है इन्हें अगला सचिन मिल गया हैं लेकिन शायद ही इन्हें अगला धोनी मिल पाएं। क्षमा चाहूंगा आपके रिकॉर्डो और उपलब्धियों का जिक्र नहीं किया, क्योंकि वो किसी के करने की मोहताज नहीं हैं। इजाजत दीजिये..अगर लिखने लग जाऊ तो शायद पुस्तक लिख डालु आपपे। आप हमेशा मेरे आइडल और हीरो रहोगे।

Wah bhai mza aa gya pdhkr...
ReplyDeleteपढ़ने के लिए शुक्रिया आपका।
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